Diwali 2026 पर दीयों, रंगोली और लक्ष्मी-गणेश पूजा थाली से सजा घर का प्रवेश द्वार

दिवाली 2026 (Diwali 2026): कब है दिवाली, लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

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दिवाली 2026 (Diwali 2026): कब है दिवाली, लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और 5 दिवसीय त्योहार की पूरी जानकारी

दीपों का त्योहार दिवाली हर साल अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश लेकर आता है। इसकी तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं। घरों की सफाई होती है, बाज़ारों में रौनक बढ़ती है और हर परिवार में मिठाइयों व दीयों की चर्चा होती है। इस साल भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिवाली 2026 कब है और लक्ष्मी पूजा का सही समय क्या रहेगा।

इस लेख में आपको दिवाली 2026 की सही तारीख, लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त, पांचों दिनों का कैलेंडर, पूजा विधि, सामग्री की सूची, सजावट के विचार और सुरक्षित दिवाली के सुझाव एक ही जगह मिलेंगे।

दिवाली 2026 (Diwali 2026) कब है? (तारीख और दिन)

इस वर्ष दिवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि कार्तिक मास की अमावस्या को पड़ती है। इसी रात गणेश-लक्ष्मी पूजन किया जाता है।

विवरणजानकारी
त्योहारदीपावली (दिवाली)
तारीख8 नवंबर 2026
दिनरविवार
तिथिकार्तिक अमावस्या
मुख्य पूजागणेश-लक्ष्मी पूजन
विक्रम संवत2083

दिवाली का त्योहार रविवार को पड़ने से ज़्यादातर परिवारों को छुट्टी मिलेगी। इससे पूजा, मेल-मिलाप और खरीदारी के लिए आराम से समय निकल सकेगा।

दिवाली/Diwali 2026 लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे शुभ माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का वह समय है जब स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। नई दिल्ली के लिए ड्रिक पंचांग के अनुसार समय इस प्रकार है:

  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक

ज़रूरी बात: पूजा का मुहूर्त हर शहर के सूर्यास्त के हिसाब से थोड़ा बदलता है। मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता या विदेश में रहने वाले लोगों को अपने शहर का मुहूर्त स्थानीय पंचांग या मंदिर के पुजारी से ज़रूर पूछ लेना चाहिए। विदेश में बसे लोग भारतीय समय को अपने समय में बदलकर पूजा न करें। उन्हें अपने शहर के सूर्यास्त के बाद वाला मुहूर्त ही देखना चाहिए।

कई पंचांगों में समय के अंतर कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक देखे जाते हैं। इसका कारण गणना की पद्धति और स्थान का अंतर है। इसलिए अपने परिवार के पंडित या भरोसेमंद पंचांग का समय अंतिम मानें।

दिवाली 2026 का पांच दिवसीय कैलेंडर

दिवाली केवल एक दिन का पर्व नहीं है। यह पांच दिनों तक चलने वाला उत्सव है, और हर दिन की अपनी परंपरा है।

1. धनतेरस, शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, बर्तन या झाड़ू खरीदना शुभ होता है। बहुत से परिवार नए बर्तन या सिक्का खरीदकर शुभ शुरुआत करते हैं।

2. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), शनिवार, 7 नवंबर 2026

इस दिन घर के बाहर यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है। कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था। इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं, और शाम को दीये जलाकर घर रोशन किया जाता है।

3. दिवाली / लक्ष्मी पूजा, रविवार, 8 नवंबर 2026

यह मुख्य दिन है। शाम को शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा होती है। इसके बाद घर, दुकान और दफ़्तर में दीये जलाए जाते हैं। व्यापारी इस दिन चोपड़ा पूजन (बही-खाता पूजन) भी करते हैं।

4. गोवर्धन पूजा / अन्नकूट, सोमवार, 9 नवंबर 2026

इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा याद की जाती है। मंदिरों में अन्नकूट का भोग लगता है। कई जगहों पर इसी दिन नया साल भी मनाया जाता है।

5. भाई दूज, मंगलवार, 10 नवंबर 2026

उत्सव का समापन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के पर्व से होता है। बहनें भाई को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई उन्हें उपहार देते हैं।

(तिथियों में कुछ क्षेत्रीय पंचांगों के अनुसार एक दिन का अंतर संभव है, इसलिए अपने क्षेत्र का पंचांग देख लें।)

दिवाली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

दिवाली से कई कथाएं और मान्यताएं जुड़ी हैं। इसी वजह से यह पर्व अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में अपने ढंग से मनाया जाता है।

भगवान राम की अयोध्या वापसी: सबसे प्रचलित कथा के अनुसार चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे। नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। तभी से दीपोत्सव की परंपरा चली आ रही है।

समुद्र मंथन और माता लक्ष्मी: मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या को समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा से धन, समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है।

जैन और सिख परंपराएं: जैन धर्म में यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण से जुड़ा है। सिख परंपरा में इसी समय बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है, जो गुरु हरगोबिंद साहिब की रिहाई की याद दिलाता है।

सामाजिक अर्थ: धार्मिक पक्ष के अलावा दिवाली रिश्तों को जोड़ने का पर्व है। लोग पुरानी शिकायतें भुलाकर एक-दूसरे के घर जाते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं।

लक्ष्मी-गणेश पूजा सामग्री की सूची

पूजा शुरू करने से पहले नीचे दी गई सामग्री पहले से इकट्ठा कर लें:

  • लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र
  • लाल या पीला साफ़ कपड़ा (चौकी के लिए)
  • कलश, आम के पत्ते और नारियल
  • रोली, चावल (अक्षत), हल्दी, कुमकुम
  • कमल या गेंदे के फूल, फूलमाला
  • घी या तेल के दीये, रुई की बाती
  • धूप, अगरबत्ती, कपूर
  • मिठाई, खील-बताशे, फल, मेवा
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची
  • चांदी या सोने के सिक्के
  • गंगाजल और पंचामृत
  • बही-खाता या पुस्तकें (व्यापारियों के लिए)

लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि (स्टेप बाई स्टेप)

  1. सफाई और स्नान: पूजा से पहले घर साफ़ करें और स्वयं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. चौकी की स्थापना: पूजा स्थल पर चौकी रखें, उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। गणेश जी को लक्ष्मी जी के बाईं ओर रखने की परंपरा है।
  3. कलश स्थापना: कलश में जल भरें, उसमें सिक्का और अक्षत डालें, ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल स्थापित करें।
  4. संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर अपना नाम, स्थान और पूजा का उद्देश्य बोलते हुए संकल्प लें।
  5. गणेश पूजन: सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। तिलक लगाएं, फूल और दूर्वा चढ़ाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें।
  6. लक्ष्मी पूजन: माता लक्ष्मी को स्नान कराकर वस्त्र, फूल, कुमकुम और मिठाई अर्पित करें। इस मंत्र का जाप करें: “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।”
  7. दीप प्रज्वलन: घी के दीये जलाएं और पूजा स्थल, मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई तथा आंगन में रखें।
  8. आरती और भोग: “ॐ जय लक्ष्मी माता” की आरती करें और खील-बताशे व मिठाई का भोग लगाएं।
  9. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद परिवार और पड़ोसियों में प्रसाद बांटें।

व्यापारी वर्ग पूजा के समय नई बही, कलम और तराजू का भी पूजन करते हैं।

घर की सजावट के आसान और सुंदर आइडिया

  • दीयों की कतार: मिट्टी के दीये सबसे पारंपरिक और सुंदर विकल्प हैं। इन्हें मुख्य द्वार, खिड़कियों और बालकनी की रेलिंग पर सजाएं।
  • रंगोली: चावल के आटे, रंगों, फूलों की पंखुड़ियों या फूलों से रंगोली बनाएं। मुख्य द्वार पर रंगोली शुभता का प्रतीक मानी जाती है।
  • तोरण और बंदनवार: गेंदे के फूलों और आम के पत्तों से बना तोरण दरवाज़े की शोभा बढ़ाता है।
  • फेयरी लाइट्स: कम बिजली खर्च वाली एलईडी लाइट्स घर को सुंदर और सुरक्षित तरीके से रोशन करती हैं।
  • हस्तनिर्मित सजावट: स्थानीय कारीगरों से लैंप, कंदील और सजावटी सामान खरीदकर आप उनकी आमदनी में भी मदद करते हैं।

इको-फ्रेंडली और सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं?

दिवाली के आसपास कई शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ने की चिंता रहती है, इसलिए त्योहार को जिम्मेदारी से मनाना ज़रूरी है।

  • कम धुएं और कम शोर वाले पटाखे चुनें, या पटाखों के बिना दीयों की रोशनी से ही उत्सव मनाएं।
  • अपने शहर में पटाखों से जुड़े स्थानीय नियमों और समय-सीमा का पालन करें।
  • बच्चों को हमेशा बड़ों की निगरानी में ही फुलझड़ी या पटाखे जलाने दें। पास में पानी की बाल्टी रखें।
  • सिंथेटिक कपड़ों के बजाय सूती कपड़े पहनें, क्योंकि वे आग पकड़ने का जोखिम कम करते हैं।
  • पूजा के फूल और सामग्री को नदी-नालों में फेंकने की बजाय खाद बनाने में इस्तेमाल करें।
  • पालतू जानवरों को शोर से दूर, सुरक्षित और शांत जगह पर रखें।
  • मिठाइयां खरीदते समय ताज़गी और साफ़-सफ़ाई देखें। मिलावट से बचने के लिए भरोसेमंद दुकान चुनें।

दिवाली पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • मुहूर्त से पहले घर की सफाई पूरी कर लें।
  • पूजा परिवार के साथ मिलकर करें।
  • ज़रूरतमंदों को मिठाई, कपड़े या दीये दान करें।
  • दीये जलाने के बाद उनकी निगरानी रखें।

क्या न करें:

  • पूजा के दौरान मोबाइल या शोर-शराबे से ध्यान न भटकाएं।
  • बिजली के तारों के पास दीये या मोमबत्ती न रखें।
  • उधार लेकर दिखावे के लिए ज़रूरत से ज़्यादा खर्च न करें।
  • पूजा के दिन झगड़े और नकारात्मक बातों से बचें।

दिवाली 2026 की शुभकामना संदेश

  • “दीपों की यह रोशनी आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए। शुभ दिवाली!”
  • “माता लक्ष्मी आपके घर में धन-धान्य की वर्षा करें और गणेश जी सारी बाधाएं दूर करें। दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं!”
  • “इस दिवाली हर घर रोशन हो, हर दिल खुशियों से भर जाए।”

अन्य लेख :

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. दिवाली 2026 कब है?

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी।

2. दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली के लिए लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक है। अलग-अलग शहरों में यह समय बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।

3. धनतेरस 2026 कब है?

धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है।

4. छोटी दिवाली 2026 कब है?

छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) शनिवार, 7 नवंबर 2026 को है।

5. भाई दूज 2026 कब है?

भाई दूज मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

6. देव दीपावली 2026 कब है?

देव दीपावली मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है। इसे खासकर वाराणसी में भव्य रूप से मनाया जाता है।

7. लक्ष्मी पूजा सुबह कर सकते हैं?

परंपरा के अनुसार लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल का है। फिर भी, पारिवारिक या क्षेत्रीय मान्यता के अनुसार समय को लेकर अपने पुरोहित से सलाह लेना बेहतर है।

8. दिवाली 2026 पर किन चीज़ों की खरीदारी शुभ मानी जाती है?

धनतेरस और दिवाली के आसपास सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, नए कपड़े और पूजा का सामान खरीदना शुभ माना जाता है।


निष्कर्ष

दिवाली 2026 केवल रोशनी और मिठाइयों का त्योहार नहीं है। यह परिवार के साथ बिताने, रिश्तों को मजबूत करने और अपने भीतर के अंधकार को दूर करने का अवसर है। 8 नवंबर 2026 (रविवार) को शुभ मुहूर्त में गणेश-लक्ष्मी की पूजा करें। धनतेरस से भाई दूज तक पांचों दिन श्रद्धा और उल्लास से मनाएं, और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए सुरक्षित दिवाली मनाएं।

आप सभी को दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं! 🪔

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